
सजदे रुठे हैं सारे,
माना गर्दिश में हैं सितारे,
ना थक, ना रुक
बस बढा दे तू कदम,
भुला दे हर गम,
ख्वाहिशों का जहाँ,
है माना लुटा हुआ,
फिर भी आएगा वो दिन,
जब मिलेगी तुझे मंजिल।
सबको सहने पङते हैं जख्म,
किसी को ज्यादा, किसी को कम,
ना दिखा खुद पर रहम,
वक्त लगाता आया है मरहम,
धूप से खिलती है छाया,
इसी से होने का वजूद पाया।
ये डोर कट जाएगी इक दिन,
हथेली के छाले मत गिन,
सुख-दुख है जीवन के रंग,
बिन एक के भी जहाँ बेरंग।
तो बढता जा, सँवरता जा,
विचारों को तराशता जा,
दुनिया होगी और भी बेहतर
यूँ बढेगी रब की कदर ।।
3 comments
commentsvery nice......... awesome ................wonderfull.... from where are you
ReplyThik h
Replyi m from Jind Haryana
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