भीगी मुस्कान

















उम्मीद है कि कोई तो आहट हो
तेरी आवाज की कोई तो सुगबुगाहट हो,
इस बार तिल-तिल टूटती चाहतों का दंश ना झेल पाएँगे
इसीलिए चाहते हैं तेरे आने पर ही ख्वाबों की सजावट हो।।
पल-पल हो रहा है भारी बिन तेरे
ये डर ए खुदा! बस केवल घबराहट हो,
दिल को सजा दी है तब तक तेरा दीदारे-लज्जत ना करने की
कि जब तक मेरे दरो-दीवार पर ना तेरी कोई आहट हो।।
तू पुछे इक दिन कि आखिर बात क्या है?
इस सवाल में हक हो ना कि बनावट हो,
आए मेरी चौखट पर तु मुझे अपना बनाने को
काश! मेरी जिंदगी मे कभी वो भीगी मुस्कराहट हो।।

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